छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के हर क्षेत्र के लोहार समाज धर्म परिवर्तन करने पर आमादा हो गया है, बीते दिन लोहार समाज के कार्यकर्ताओं ने इस विषय पर पंचमुखी मंदिर ग्राम बोखी में बैठक कर उनके घर वापसी पर विचार विमर्श किया उन्होंने बताया कि आज हमारे लोहार समाज हिंदू धर्म त्याग कर अन्य धर्म की ओर कदम बढ़ा रहे हैं जिससे इनके समाज को ठेंस तो पहुंच ही रही है, अपितु प्रत्येक हिंदुओं के सीने में चुभता हुआ खंजर है, आज समाज अपना हिंदुत्व को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है इनके प्रयासों को देखते हुए हर हिंदू भाई चाहे वह किसी भी धर्म समुदाय का हो इनके सुरक्षा के उपाय करना चाहिए जब तक जाति प्रथा छुआछूत का भेदभाव को दूर नहीं किया जाएगा तब तक यह असंभव प्रतीत होता है इन्हीं भेदभाव जैसे कमजोरियों का फायदा बाहरी तत्व धर्म उठा रहा है इसे हर हिंदू भाइयों को समझना होगा अन्यथा हिंदुस्तान से हिंदूओं का अस्तित्व केवल और केवल एक छाप बनकर रह जाएगा।
हिंदू होने पर गर्व महसूस करने वाले डॉ काटे स्वामी जी ने कहा है किधर्मांतरण महापाप है धर्मांतरण के कारण कुल उदधार नहीं होता हिंदू धर्म त्यागने पर साधना द्वारा मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती, हिंदू धर्म त्यागने पर तीन सौ जन्म उपरांत पुनः स्वधर्म में जन्म मिलता है, इन बिंदुओं पर गौर करें तो परमात्मा ने हिंदुओं को हिंदू धर्म में पैदा कर और ईसाइयों को ईसाई धर्म में पैदा कर कोई भूल नहीं की है, बल्कि हमें अपने धर्म के प्रति श्रद्धा और विश्वास होना चाहिए यह तो ऊपर वाले के रचनात्मक क्रियाओं पर हस्तक्षेप है।छत्तीसगढ़ के संभाजी महाराज धर्मांतरण को नकारते हुए स्वधर्म के लिए बलिदान दिए थे,तो हिंदू आप भी उनके आदर्शों का लाज रखो, हिंदुओं को ध्यान में रखना चाहिए कि जिस प्रकार पानी में रहने वाली मछली" घी" में गई फिर भी उसका मरण निश्चित है, उसी प्रकार स्वधर्म त्याग कर अन्य धर्मों में जाना भी मृत्यु तुल्य है,धर्म परिवर्तन करने वाले आपने जिसने धर्म में अपना जीवन गुजर बसर करने का सोच लिया है, उस समाज के लोग भी आपको अपनाएंगे या, युं कहें कि अपनाएंगे या नहीं, यह भी आपके मन में उतार-चढ़ाव बना रहेगा यानी कुल मिलाकर कहें तो आप घर के रह जाते हैं और ना घाट के,।
आज लोहार समाज अकेला अपने कुल मर्यादाओं को लांघने वाले धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों से प्रेम पूर्वक कह रहे हैं कि वह घर वापस आ जाए, इस पर उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी कहा नहीं जा सकता, विडंबना तो यह है कि लोहार समाज के लोग बाग ने स्वयं गिरजाघर का निर्माण भी कर लिया है, इस प्रकार तो हिंदुस्तान धीरे धीरे क्रिस्तानन के रुप में ढल ना जाए,आसपास के लोहार समाज के सुधारक हिंदू धर्म बचाव के पक्ष में पंचमुखी धाम ग्राम बोखी में घुरन बाबा बोखी, चक्रधर विश्वकर्मा बाग बहार, दिलावर राम तुबा, राम गोपाल राम, बीरबल राम जमुना,विक्रम राम नामनी, कलेश्वर राम बामणमारा, देव लाल राम बामण मारा,श्रवण कुमार लेलूंगा, सुंदर राम पतराटोली, दिनेश राम बोखी, अबीरसाय उड़ीसा तिलयकानी, कलिंदर राम सहसपुर बुधनाथ राम सीमावारी मनोज राम तुबा, रवि राम सरायरोला, जयराम सिमाबारी ,चमर साय म्सीमावारी, एवं राजकुमार ग्राम बोखी से समाज सुधारक की इस बैठक में उपस्थित रहे।
एक बहुत पुराना व्यंग है- एक बार एक मांसाहारी व्यक्ति ऐसे ईसाई सामाज के बीच रहने लगा जहां सभ्य और शुद्ध शाकाहारी लोग रहा करते थे. वह व्यक्ति हर रोज मांस पकाया करता था जिसकी गंध से सारे पड़ोसी परेशान होकर पादरी के पास गए और उनसे विनती की, कि या तो वह व्यक्ति यहां से कहीं और चला जाए या अपना धर्म बदल कर ईसाई बन जाए और मांसाहार छोड़ दे.
उस व्यक्ति को जब बुला कर पूछा गया तो वह धर्म बदलने को तैयार हो गया. तत्काल उसके उपर जल छिड़क कर बोल दिया गया कि आज से तुम ईसाई धर्म के नियम व तौर-तरीकों को अपनाओगे, मांसाहार नहीं करोगे आदि-आदि. समाज के सभी लोगों ने चैन की सांस ली. लेकिन अगले ही दिन सुबह फिर से उसके घर से मांस की गंध आ रही थी. जब सबने उस व्यक्ति के घर में खिड़की से झांका तो दंग रह गया. वह आदमी हाथ में जल लिए सारे मांसाहारी पकवानों पर छिड़क-छिड़क कर बोल रहा था कि तुम आज से आलू हो, बैगन हो, तुम आज से मांस नहीं हो. जब उससे पूछा गया तो उसने तुरंत जवाब दिया कि जैसे जल छिड़कवा लेने से मेरा धर्म परिवर्तन हो गया है वैसे ही मैं भी इनका धर्म परिवर्तन कर रहा हूं।
रिपोर्टर खुलेश्वर यादव

