जिलाध्यक्ष रोहित साय की निष्काषित पार्षदों को खुली चुनौती,पार्षद इस्तीफा देकर निर्दलीय लड़कर दिखाए चुनाव
पत्थलगांव- नगर पंचायत पत्थलगांव में भाजपा समर्थित अध्यक्ष सूचिता एक्का को कांग्रेस से सांठगांठ कर अविश्वास प्रस्ताव लाने के मामले में पार्टी आलाकमान ने कड़े तेवर अपनाये है। जिसमे वार्ड क्रमांक 13 के पार्षद व नगर पंचायत उपाध्यक्ष श्याम नारायण गुप्ता समेत 5 पार्षद पुनीत डहरिया, रेखामुनी भगत, चन्द्रकला गुप्ता, आनंद गुप्ता, स्नेहलता शर्मा को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय की सहमति के बाद संगठन महामंत्री पवन साय ने 06 साल के लिए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है।
भाजपा जिला महामंत्री सुनील गुप्ता ने बताया कि पिछले दिनों पत्थलगांव नगर पंचायत की भाजपा समर्थित अध्यक्ष सूचिता एक्का के खिलाफ कांग्रेसी खेमे से सांठगांठ कर भाजपा के 6 पार्षदो ने अविश्वास प्रस्ताव लाया था जिसमे मामले को गंभीरता से लेते हुए पार्टी जिला नेतृत्व ने बैठक कर सभी 6 पार्षदो पर अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु प्रदेश नेतृत्व को पत्राचार किया था जिसके बाद प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय व संगठन महामंत्री पवन साय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर पंचायत उपाध्यक्ष श्याम नारायण गुप्ता समेत सभी 6 पार्षदों को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी छवि धूमिल करने वह अनुशासनहीनता करने वालों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिला उपाध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने कहा कि पत्थलगांव नगर पंचायत मे भाजपा का अध्यक्ष उपाध्यक्ष बनना स्व. युद्धवीर सिंह जूदेव की मेहनत का नतीजा था और उनके सपनो को ध्वस्त करने वालो पर निष्कासन की गाज गिरने के फैसले का मै स्वागत करता हूँ उन्होंने कहा कि नगर पंचायत उपाध्यक्ष श्यामनारायण व पार्षदों ने जल छूकर कसम खाई थी उसके बावजूद कपट पूर्वक सरकार गिराना इनकी ओछी मानसिकता को दर्शाता है।
भाजपा जिलाध्यक्ष रोहित साय ने नगर पंचायत उपाध्यक्ष समेत 5 पार्षदो को खुली चुनौती देते हुए तल्ख लहजो में कहा है कि वे नैतिकता के आधार पर पार्षद पद से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़कर दिखाए उन्हें भाजपा समर्थित उम्मीदवार धूल चटाने में पीछे नही रहेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है जिसमें गद्दारों के लिये कोई जगह शेष नहीं है, जिन्होंने अध्यक्ष के पीठ के पीछे खंजर भौंका है वे भी भाजपा के ही चिन्ह से चुनाव लड़ कर जीते हैं ऐसे में निष्कासित होने के बाद अब उन्हें पार्षद पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

