हमारे हिंदुस्तान के हिंदुत्व का अस्तित्व कहीं लुप्त तो नहीं हो रहा? जाहिर किया लोहार समाज के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने, जशपुर जिले के आठों तहसील के लोहार समाज कर रहे धर्मांतरण, कहीं ये राजनीति तो नहीं? श्री साय ने कहा अंतरराष्ट्रीय साजिश! - Chhattisgarhkimunaadi.com

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मंगलवार, 15 फ़रवरी 2022

हमारे हिंदुस्तान के हिंदुत्व का अस्तित्व कहीं लुप्त तो नहीं हो रहा? जाहिर किया लोहार समाज के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने, जशपुर जिले के आठों तहसील के लोहार समाज कर रहे धर्मांतरण, कहीं ये राजनीति तो नहीं? श्री साय ने कहा अंतरराष्ट्रीय साजिश!



जशपुर जिले की आठों तहसील में धर्म परिवर्तन ने तूल पकड़ लिया है, लोहार समाज के लोगों ने हिंदू धर्म त्याग कर ईसाई धर्म अपनाना प्रारंभ कर दिया है, इस समाज को हिंदू धर्म पर से विश्वास उठ गया है, या फिर ईसाई धर्म के प्रचारकों  द्वारा जातिवाद के प्रति उकसा कर धर्म परिवर्तन का प्रलोभन, भय और बहकावे के आधार पर धर्मांतरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, हिंदुओं को गुमराह कर अपने हिंदू धर्म के प्रति नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं, और ईसाई धर्म अपनाने पर विवश किया जा रहा है, हमारे हिंदू भाई क्या यह नहीं जानते या फिर जानना नहीं चाहते कि जो स्वयं को धर्म प्रचारक  कहलवाते हैं, और लोगों को संबोधित कर अपने धर्म को सबसे बड़ा दर्जा देते हैं, इनको इसी काम के लिए विदेशों से मोटी मोटी धनराशियां मिलती है, इन प्रचारक का इस तरह शोर मचाना क्या यह सिद्ध नहीं करता कि वह केवल और केवल हिंदू समाज में नफरत का बीज बोना चाहते हैं, हर धर्म का व्यक्ति भली भांति जानता है कि उसे जिस धर्म में जन्म मिला है वह उसका जन्म सिद्ध अधिकार है, यदि बाद में धर्म परिवर्तन करता है तो यह कुदरत की इच्छा के विरुद्ध है, यदि लोग सचमुच अपना धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं तो इन्हें भगवान भी नहीं रोक सकता,  अंतरात्मा की आवाज के आगे राज्य और समाज की ताकत भी कुछ नहीं है, धर्म बाहर से नहीं थोपा जाता वह तो अंदर से खिलता है, अगर कोई व्यक्ति किसी धर्म के सिद्धांत को भली-भांति बुझकर समझकर उस में पारंगत होना चाहता है, तो निश्चय ही यह पवित्र घटना है, लेकिन जब धर्म थोक में किसी वस्तु की भांति बांटा जाए तो वह धर्म नहीं राजनीति है।

      धर्म परिवर्तन का कार्य केवल आदिवासी, ग्रामीणों और गरीबों के बीच क्यों होता है? उसे शहरों के शिक्षित, संपन्न अनुभवी वर्गों तक क्यों नहीं ले जाया जाता?

क्या इन्हें भूख नहीं लगती, इन्हें रोशनी की आवश्यकता नहीं है? क्या यह ईश्वर का बनाया हुआ इंसान नहीं है? अगर ईसाई धर्म बेहतर है तो इन शहरवासी बेहतर लोगों पर भी आजमा कर दिखाएं,लेकिन दुख की बात है कि धर्मांतरण केवल और केवल कमजोर, निस्सहाय, गरीब आदिवासी और छोटे वर्ग के लोगों में ही और केवल हिंदुओं पर ही आजमाया जाता है।क्या आपने कभी सुना है कि ईसाई, मुसलमान बना दिया गया, या मुसलमान, ईसाई! नहीं न! फिर ये धर्म परिवर्तन क्यों?

      लोहार समाज के सामाजिक कार्यकर्ता ने अपने समाज के दूसरे कार्यकर्ता( पंचमुखी महादेव ग्राम बोखी के श्री घुरन राम विश्वकर्माजी) को पत्र लिखकर अत्यंत दुख जताते हुए अवगत कराते हुए लिखा है कि- फरसाबहार व समस्त जिला जशपुर के लगभग आधे से अधिक लोहार समाज के हिंदू भाई धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म में चले जा रहे हैं, हमारे समस्त लोहार समाज जशपुर द्वारा बैठक कर जो हिंदू धर्म से अन्य धर्म में चले गए हैं, उनको सभी प्रकार से बात विचार कर समझाने का प्रयास किया गया, किंतु हमारे समाज की बात का कोई लाभ नहीं हुआ, अब तक लोहार समाज से लगभग 5000 से भी ज्यादा हमारे हिंदू भाई इसाई धर्म में जा चुके हैं, यह बस लोहार समाज की बात है, हमारे हिंदू समाज में कई जाति के लोग हैं,भगवान ना करें उनका भी यही स्थिति ना आ जाए, अगर ऐसा हुआ तो हमारा हिंदुस्तान के हिंदुत्व का अस्तित्व ही मिट जाएगा, और हम ऐसा कभी नहीं चाहेंगे, इस धर्म परिवर्तन को यथाशीघ्र, जो भी उपाय हो जैसा भी हो उनको वापिस व जो जाने वाले हैं उनको रोका जाए।

     अनुसूचित जनजाति  आयोग के अध्यक्ष श्री नंदकुमार साय  से इस धर्मांतरण के विषय में छत्तीसगढ़ की मुनादी  टीम द्वारा दूरभाष के माध्यम से विचार जाना गया तो उन्होंने कहा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय साजिश है, बेचारे गरीब, निस्सहाय, लोगों को यह पादरी लोग बहला फुसलाकर धर्म परिवर्तन करने को मजबूर कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार अभी सत्ता में है, और कांग्रेस सरकार भली-भांति जानती है कि हिंदू भाई उनके मतदाता नहीं है, इसलिए पादरी लोग ऐसी स्थिति को अंजाम देते हैं, और भ्रमित कर प्रलोभन भी दिया जाता रहा होगा,

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के लोगों को संगठित कर उन्हें पुनः घर वापसी पर जोर देना होगा।

  रिपोर्टर खुलेश्वर यादव

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