रिपोर्टर खुलेश्वर यादव
जनपद पंचायत फरसाबहार मुख्यालय के करीब आआत्मानंद स्कूल के शिक्षार्थियों ने साक्षरता दिवस के अवसर पर रैली व नारों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने हेतु विकास खंड कार्यालय से मुख्य मार्ग होते हुए थाना व स्वास्थ्य केंद्र फरसाबहार तक गई, इस बीच रैली में शामिल बच्चों और शिक्षक के जुबां पर कई जागरूकता वाली नारों से फरसाबहार की गलियां गूंज उठी, जीना है तो पढ़ना सीखो, कागज व कलम से लड़ना सीखो।
जगी राष्ट्र की क्या पहचान, पढ़ा लिखा हो हर इंसान।
बच्चों को भेजो स्कूल, नहीं तो होगी बड़ी भूल।
चौका बर्तन और सफाई, फिर भी औरत करे पढ़ाई।
हर घर में दीप जलाओ अपने बच्चे को स्कूल पढ़ाओ इत्यादि।
लोगों को साक्षरता के महत्व का बोध कराते हुए रैली ने यह संदेश उजागर किया कि साक्षरता का मतलब केवल अक्षर ज्ञान नहीं है बल्कि निरक्षर को साक्षर बनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है, आज समाज में साक्षर महिला- पुरुष को अलग दर्जा दिया जाता है, साक्षरता को बढ़ावा देना आज से नहीं वर्षों से चली आ रही है, लेकिन उसकी मध्दिम रोशनी, तीव्रता से धडधकता हुआ ज्वाला नहीं बन पा रहा है। समाज में पढ़े लिखे लोगों को कम से कम सरकार की योजनाओं के बारे में असाक्षरों को बता कर जागरूक किया जा सकता है, शुरुआत छोटी ही क्यों ना हो पर इसके लाभ अनेक होते हैं, छोटी-छोटी कोशिशें भी कई बार बड़ा आकार ले लेती है।
8 सितंबर विश्व साक्षरता दिवस पर आप समाचार पाठकों को भी " छत्तीसगढ़ की मुनादी" का यह संदेश है कि अगर आप घर पर किसी गरीब बच्चे को न पढ़ा पाए, तो अपने यार दोस्तों के साथ छोटा सा समूह बनाकर उसके स्कूल जाने की व्यवस्था जरूर कर सकते हैं। आप कुछ समय निकालकर उन गरीब और असहाय लोगों के बीच शिक्षा के महत्वता को साझा कर सकते हैं, जहां शिक्षा से अछूते लोग शिक्षा से ज्यादा जरूरी मजदूरी को, और ज्ञान से ज्यादा जरूरी पेट भरना समझते हैं, आप उन्हें यह भी कहें कि शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती, किसी भी उम्र में वह पढ़ लिख सकता है, सीख सकता है, यकीन मानिए अगर आप में कुछ खुद्दारी है तो उक्त लिखित कथनों का अनुसरण करें तो शायद भारतवर्ष से निरक्षरता ही समाप्त हो जाए, और हम गर्व से कह सकें- हमारा भारत,
साक्षर भारत।
साक्षरता सप्ताह का उद्देश्य सभी वर्ग को ध्यान में रखकर साक्षरता कार्यक्रम हेतु वातावरण निर्माण करना साक्षरता सप्ताह के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है, जिसमें सभी विभागों व जनसामान्य के सहयोग से साक्षरता सप्ताह अंतर्गत विविध गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
प्रदीप कुजुर् (प्राचार्य), धनंजय कुमार मिश्रा, अमृत कुमार सिंह, आकाश जयसवाल, (प्रधान पाठक), रुख्सार बानो (प्र, पा.) नंदकिशोर परहा शिवानी तिवारी, बसंती पैकरा, सपना नागेशिया, आदित्य पैकरा कौशल यादव, साक्षी महाथा, सरिता तिरकी, कुसुमलता, प्रेमा , पूनम चौहान, सोनी, प्रीति और अन्य शिक्षक साथी के अगुवाई और धनंजय मिश्रा जी का विशेष मार्गदर्शन रहा।


