जांजगीर चाम्पा-उच्चाभिठ्ठी में यादव समाज के तत्वावधान में चल रहे भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित प्रेम शंकर चौबे जी ने अजामिल मोक्ष का वर्णन करते हुवे - Chhattisgarhkimunaadi.com

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गुरुवार, 10 मार्च 2022

जांजगीर चाम्पा-उच्चाभिठ्ठी में यादव समाज के तत्वावधान में चल रहे भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित प्रेम शंकर चौबे जी ने अजामिल मोक्ष का वर्णन करते हुवे


प्रभु के नाम मात्र लेने से इस भवसागर से मुक्ति मिल जाती है-पंडित प्रेम शंकर चौबे।


रिपोर्टर-सुरेश कुमार यादव

जांजगीर चाम्पा-उच्चाभिठ्ठी में यादव समाज के तत्वावधान में  चल रहे भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित प्रेम शंकर चौबे जी ने अजामिल मोक्ष का वर्णन करते हुवे कहते है कि भगवान के नाम मात्र की सुमिरन कर लेने से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। अजामिल दुष्ट व दुराचारी होने के बावजूद संतो की संगत से उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।आगे कथा का वर्णन करते हुवे कहते है कि अजामिल कन्यकुब्ज ब्राम्हण कुल में जन्मे कर्मकाण्डी थे। एक दिन नदी की तरफ जाते हुवे एक नर्तकी को देखा जो वेश्या थी उसे घर ले अयेऔर पत्नी बना कर रख लिया।एक दिन सन्तो को हुजूम उसी रास्ते से गुजर रहा था शाम होने पर वही डेरा जमा लिया ये सब देख कर अजामिल को बहुत गुस्सा आया और बुरा भला कहने लगा यह सब सुन उसकी पत्नी नर्तकी बहार आई और समझा कर अंदर ले गई।सुबह होते ही दक्षिणा मांगने आये संतो पर एक बार  अजामिल फिर आग बबूला हो गया तब सन्तो ने कहा हमे धन,दौलत कुछ नही चाहिये बस अपने पुत्र का नाम नारायण रख लेना यह कह कर चले गये।अजामिल ने वैसा ही किया जब अंत समय आया तो प्रेम वश अपने पुत्र की नाम नारायण लेने मात्र से ही अजामिल की मोक्ष हो गई। पंडित जी  के द्वारा नरसिंह प्राकट्य की कथा भी सुनाई गई।मख्य यजमान भुरुलाल यादव -खीक बाई यादव,सरजू यादव-उमेंदा व प्यारेलाल-सीता बाई यादव है।  कथा 8 मार्च से प्रारम्भ होकर 15 मार्च तक होगी कथा का समय दोपर दो बजे से प्रारंभ हो कर शाम 7 बजे तक होती है।कथा सुनने के लिये गांवो के अलावा सिवनी,कोसमन्दा, फरस्वनी, कुरदा,महुदा,बहेरा डीह आदि गांवों के लोग रोज पहुँच रहे है।

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