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शुक्रवार, 18 मार्च 2022

आज भी प्राचीन युग सा स्कूल, संस्था दर्पण एनजीओ ने कराया लकड़ी बांस और घांस से अतिरिक्त कक्ष के साथ शेड का निर्माण -----विकास खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा प्रस्ताव पारित---

 


      जशपुर जिले के विकासखंड फरसाबहार के अंतर्गत ग्राम सहसपुर के आश्रित ग्राम टोंगरीपारा मुख्यालय फरसाबहार से महज 10- 12  किलोमीटर की दूरी पर स्थित है,स्कूल की हालत जर्जर हो चुकी है, अतिरिक्त कक्ष में ही पहली से पांचवी तक के बच्चों का अध्ययन कराया जाता है, यहां एक शिक्षक और एक शिक्षिका मौजूद है, बच्चों की कुल संख्या यहां 27 से 28 है अतिरिक्त कक्ष में ही स्कूल की आवश्यक वस्तुएं एवं शिक्षक और बच्चों का उठना बैठना भी उसी में होता है, एनजीओ संस्था दर्पण के कार्यकर्ता लोचन यादव सहपाठी लखन साय के द्वारा इस समस्या को देखते हुए लोगों को एकत्र कर और ग्रामीणों के सहयोग से लकड़ी बांस और घांस से एक वैकल्पिक व्यवस्था शेड का निर्माण कराया गया जिसमें पहली और दूसरी के छात्र छात्राओं को बैठाकर शिक्षा ग्रहण कराया जाएगा, मौके पर पहुंचे विकास खंड शिक्षा अधिकारी चुनू राम भगत ने दूरभाष के जरिए बताया कि स्कूल भवन जर्जर होने के कारण इसे ( डिस्मेंटल) यानी विखंडित किया गया है, एक अतिरिक्त कक्ष ही है जिसमें पहली से पांचवी तक के बच्चे अपना भविष्य गढते हैं, विकास खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि प्रस्ताव रायपुर भेज दिया गया है, उसके लिए नया स्कूल भवन सेक्शन होगा या फिर अतिरिक्त कक्ष सेक्शन होगा।


   आज के युग में विद्यालय के लिए उपयुक्त भूमि उचित रखरखाव शुद्ध जल वायु एवं प्रकाश आदि का होना अनिवार्य है, अच्छी स्थिति के साथ-साथ भवन का भी उपयुक्त ढंग से निर्माण हो तो शैक्षिक वातावरण अधिक उत्तम होगा, आज की शैक्षिक आवश्यकताएं प्राचीन युग से बहुत अधिक भिन्न रहते हुए भी आश्रम की भांति शिक्षा ग्रहण करना सोचनीय है, इस तरह विद्यालय की स्थिति का प्रभाव स्कूल के पूर्ण शैक्षिक व्यवस्था एवं छात्र छात्राओं के शारीरिक व मानसिक विकास पर पड़ता है, शासन कहती है कि विद्यालय में हर वो चीज की व्यवस्था अनिवार्य है, जिससे विद्यार्थी विद्या अर्जित कर सकें इस ओर शासन की नजर अंदाजी वाकई निंदनीय होगी।

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