जशपुर,रायगढ़ और सरगुजा जिले का सीमांत क्षेत्र पत्थलगांव बीते दो दशकों से अवैध गौ तस्करी के लिए कुख्यात रहा है। पत्थलगांव से सटे रायगढ़ जिले के आखरी छोर पर बसा ग्राम चरखापारा इसका प्रमुख केंद्र रहा है। यहां बने साप्ताहिक बाजार में प्रत्येक सोमवार को लगने वाले मवेशी बाजार से हजारों मवेशियों की अवैध तस्करी होती है जो पत्थलगांव से होकर झारखंड,बिहार और बंगाल के बूचड़खानों में ले जाए जाते हैं। प्रत्येक सोमवार को अलग-अलग क्षेत्रों से यहां मवेशी लाए जाते हैं और फिर उन्हें तस्करों के हवाले कर दिया जाता है। तीनों जिलों की सीमा से सटा होने के साथ ही समीपस्थ राज्यों की सीमा से लगा होने से यह क्षेत्र मवेशी माफियाओं के लिए तस्करी का उपयुक्त रास्ता साबित होता है। यहां से हो रही मवेशियों की अवैध तस्करी में रास्ते में पड़ने वाले थाना और पुलिस चैकियों की भूमिका को लेकर सवाल पहले भी उठते रहे हैं। इनमें एक कड़ी और भी जुड़ गई है। एक मानवाधिकार संगठन के सदस्य ऋषिकेश मिश्रा ने लैलूंगा पुलिस के साथ ही पुलिस सेवा के अन्य प्रदाताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने इस संबंध में गौ सेवा आयोग के सदस्य शेखर त्रिपाठी को भी शिकायत पत्र सौंपकर दोषी पुलिसकर्मियों के साथ ही इसमें संलिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। लैलूंगा थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम राजपुर निवासी शिकायतकर्ता ऋषिकेश छग मानव अधिकार जेजेएफ के रायगढ़ ग्रामीण के जिला उपाध्यक्ष हैं वहीं वे रायगढ़ में संचालित संबलपुरी गौठान समिति के संचालक सदस्यों में भी शामिल हैं। उन्होंने घटना के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए बताया कि 25 अक्टूबर को वे निजी कार्य से रायगढ़ गए थे। देर रात वापस लौटते समय उन्होंने राजाआमा के समीप तीन लोगों को लगभग 150 मवेशियों को हांक कर ले जाते हुए देखा। संदेह होने पर उन्होंने संबंधित लोगों से इसके बारे में पूछताछ की परंतु वे कोई भी जानकारी को तैयार नहीं हुए। इस पर उन्होंने लैलूंगा थाने में इसकी सूचना देने का प्रयास किया परंतु लैलूंगा पुलिस से संपर्क ही नहीं हो पाया। आखिर उन्होंने त्वरित कार्यवाही हेतु बनाए गए नंबर 112 पर सूचना दी गई परंतु उनकी ओर से भी तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाए करीब 40 घंटे तक भी कार्यवाही न करना बहुत ही निंदनीय है। उधर अवसर का लाभ उठाकर मवेशी तस्कर समीप के झगरपुर जंगल में घुस गए। सूचना देने के बावजूद पुलिस द्वारा मवेशी तस्करी को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाने से स्पष्ट है कि पुलिस द्वारा इसमें रूचि नहीं ली जा रही है जिससे अवैध तस्करी को बढ़ावा मिल रहा है। श्री मिश्रा ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में लैलूंगा थाना प्रभारी, कोरबा व रायगढ़ जिले के पुलिस अधीक्षकों को भी इस संबंध में शिकायत पत्र सौंपा है।
सरपंच पर भी उठे सवाल
गौ तस्करी के मामले में कोरबा जिला के ग्राम पंचायत करतला के सरपंच पर भी उंगलियां उठ रही हैं। उल्लेखनीय है कि अपनी शिकायत के साथ ही ऋषिकेश मिश्रा द्वारा ग्राम पंचायत करतला के सरपंच द्वारा मवेशियों की बिक्री के संबंध में दी गई एक रसीद भी प्रस्तुत की गई है। श्री मिश्रा के मुताबिक यह रसीद मवेशी तस्करों ने उन्हें दी थी जिसमें सरपंच करतला के सील व हस्ताक्षर हैं। इसमें ग्राम औरीजोर पो कोल्हेनझरिया थाना तुमला निवासी व्यक्ति के नाम पर 46 नग मवेशी खरीदे जाने का उल्लेख है। श्री मिश्रा का कहना है कि खेती किसानी के नाम पर किसानों के लिए होने वाली खरीद बिक्री की आड़ में अवैध कार्यों के लिए इसकी आड़ ली जा रही है। उनका कहना है कि एक साथ 46 नग मवेशियों की एक ही व्यक्ति को बिक्री अपने आप में ही इसकी आड़ में होने वाले गोरखधंधे की पुष्टि करने के लिए काफी है। दूसरी ओर इसमें 46 नग मवेशियों की कीमत केवल 30 हजार रू ही दिखाई गई है जिससे एक मवेशी की कीमत 1हजार रू से भी कम पड़ती है जो किसी भी स्थिति में संभव नहीं है। वर्तमान में एक बछिया की कीमत भी करीब 10 हजार रू तक पहुंच जाती है ऐसे में ग्राम सरपंच की भूमिका की जांच किए जाने की भी आवश्यकता है ताकि इस प्रकार मवेशियों की अवैध तस्करी को रोका जा सके।
*शेखर त्रिपाठी ने जताई नाराजगी*
गौ सेवा आयोग के सदस्य शेखर त्रिपाठी ने पूरे मामले में पुलिस और सरपंच की भूमिका पर गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मार्गदर्शन में छग सरकार गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री की नरवा गरवा घुरवा बाड़ी योजना इसका स्पष्ट प्रमाण है कि गौवंश के संरक्षण के प्रति मुख्यमंत्री की सोच कितनी स्पष्ट है। गौ सेवा आयोग मुख्यमंत्री के मंशानुसार अवैध मवेशी तस्करी को रोकने के साथ ही इनके कल्याण के लिए हर संभव उपाय करने को कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र से अवैध तस्करी को रोकना सर्वप्रथम पुलिस का ही कार्य है और पुलिस को इसे रोकने के लिए स्वयं ही प्रयास करने चाहिए। मवेशी तस्करी के मामलों के सामने आने से स्पष्ट है कि पुलिस के प्रयास नाकाफी है। ऐसे में यदि आम लोग इसमें सहायता के लिए सामने आ रहे हैं तो यह एक सराहनीय पहल है और पुलिस को इस पर त्वरित कार्रवाई करके मिसाल प्र्रस्तुत करनी चाहिए थी। इसे उन्होंने एक गंभीर विषय बताते हुए गौ सेवा आयोग में उठाने के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में पुलिस के उच्चाधिकारियों से भी इस संबंध में चर्चा करने की बात कही है। श्री त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष को पूरे मामले से अवगत करा दिया है और जल्द ही आयोग की बैठक में इस गंभीर विषय पर प्रमुखता से चर्चा पश्चात कार्यवाही की बात कही है।

