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शनिवार, 3 सितंबर 2022

विधवा औरत के निवास गृह को हाथी ने किया ध्वस्त,,,, शासन की मुआवजे का इंतजार ना कर खुद से करवा रही मरम्मत......।

 


रिपोर्टर खुलेश्वर यादव

   जंगल किनारे बसे ग्राम पंचायत सीमाबारी के बस्ती बनमुंडा में बीती रात शायद भीड़ से बिछड़ा हुआ और भीड से ही सताया हुआ हाथी ने बनमुंडा निवासी एक विधवा औरत के घर को तोड  दिया है, बरसात के इस मौसम में महिला का परिवार कहां जाएगा, यह सोचकर  ग्राम वासियों ने उस घर को सुधार करना शुरू किया है, आपको बताते चलें कि आज से 7-8 वर्ष पूर्व उक्त महिला का परिवार का घर जंगल के नजदीक बसता था, लेकिन जब से हाथियों का आवागमन होने लगा तब भी यह वही पर टिके थे, पर एक रात हाथियों के झुंड ने उक्त महिला के परिवार और घर को चारों तरफ से घेर लिया, और तोड़फोड़ करने लगे परिवार ने जैसे-तैसे स्वयं को बचाया लेकिन यह मंजर (हालात) ऐसे थे कि महिला के पति रामेश्वर भगत ने अपनी सूझबूझ से हाथियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए एक बाजा का सहारा लिया और इसके परिवार आसानी से बस्ती की ओर भागने में सफल हुए थे, मगर अफसोस कि उस समय रामेश्वर भगत के समीप एक हाथी आकर खड़ा हुआ था, जिसे वह देख नहीं पाया अचानक नजर पड़ते ही वह इतना डरा और डर कर भागने में सफल भी हुआ और लोगों को आपबीती भी बताई लेकिन उस रात की डर और भय ने दो-चार दिन में ही उसके प्राण ले लिए, उस महिला के लिए हाथियों का इस कदर उसी घर में बार-बार धावा बोलना विधान बन गया है, पूर्व में घटित घटना का मुआवजा शायद ही इस औरत को कोई दे पाएगा, और आज फिर से उसकी आंखें नम हो गई है जिसकी व्यवस्था और हालात शासन प्रशासन को नजर नहीं आती उसे तो केवल कागजों में लिखा हुआ सत्यापित कॉपी चाहिए जो झूठ की बुनियाद पर भी बनाई जा सकती है, और ना जाने कितने घर कितने परिवार होंगे जो इस तरह के तकलीफों से जूझते हुए अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

     बीते रात लगभग 11:00 बजे की घटना है जब पूरी बस्ती नींद की आगोश में लिपटा था, तस्वीर में साफ नजर आ रही है कि हाथी ने उस घर को किस तरह से अपना शिकार बनाया है, बस्ती वाले की एकजुट होकर चिल्लाने पर हाथी ने अपना रूख बदला और जंगल की ओर लापता हो गया।

       युवा शक्ति की इस सराहनीय कार्य को देखते हुए वन परीक्षेत्र अधिकारी व प्रशासन को हाथी भगाने का प्रशिक्षण व कार्य तथा अन्य हाथी भगाने का यंत्र युवाओं को दे देना चाहिए युवाओं का यह संगठन हाथी आने की सूचना पर ही आगे निकल आते हैं, मनोज भगत, राजू , जागेश्वर, प्रदीप, दिलीप, रामलाल , अकबर, नेहरु, जगमोहन जैसे युवाओं का कार्य काबिले तारीफ है।

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