गोवर्धन पूजा करने के पीछे धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण इंद्र का अभिमान चूर करना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाकर गोकुल वासियों की इंद्र से रक्षा की थी. माना जाता है कि इसके बाद भगवान कृष्ण ने स्वंय कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन 56 भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का आदेश द दिया था तभी से गोवर्धन पूजा की प्रथा आज भी कायम है, और हर साल गोवर्धन पूजा का त्योहार मनाया जाता है, इसी परंपरा को कायम रखते हुए ग्राम तमा मुंडा एवं आसपास के यादव समाज के लोगों ने ग्राम तम्मा मुंडा में स्थित जगन्नाथ मंदिर के प्रांगण में गौमाता की पुजा अर्चना कर दक्षिण की ओर स्थित गिरी गोवर्धन पर्वत की ओर प्रस्थान किए शुक्रवार दोपहर में बाजे गाजे के साथ श्री कृष्ण की पालकी सजाकर गिरी गोवर्धन पर्वत में स्थापित कर संध्याकाल पूजा अर्चना कर रात्रि जागरण करके सभी यदुवंशी समाज के लोगों ने कीर्तन भजन करके, गोवर्धन भगवान की पूजा की, इस अवसर पर महिला एवं पुरुष बहुतायत संख्या में उपस्थित थे, जिनमें मुख्य रूप से वरिष्ठ समाजसेवी एवं" यदुवंशी समाज सेवा समिति" फरसाबहार के संरक्षक श्री किया राम सुंडरु,श्री टंकेशवर राम यादव सुडंरु,श्री ऋषि कुमार यादव जिला उपाध्यक्ष,श्री चेता राम यादव जिला सह सचिव,श्री गोवर्धन प्रसाद यादव ब्लाक अध्यक्ष महाकुल समाज सेवा समिति फरसाबहार, श्री विपिन यादव टिकलीपारा,श्री कुलमणी टिकलीपारा, एवं श्रीलोचन राम यादव तमामुंडा आयोजक मंडल के अध्यक्ष तथा सैंकडों संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित होकर भव्ययता पूर्वक सम्पन्न किया।

