रिपोर्टर-सुरेश कुमार यादव
जांजगीर चाम्पा--कोसमन्दा में स्वःलाखन लाल कौशिक व स्वः झुझी बाई की स्मृति में कौशिक परिवार में चल रहे भागवत कथा के तीसरे दिन अजामिल मोक्ष का वर्णन करते हुवे कहते है कि भगवान के नाम मात्र की सुमिरन कर लेने से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। अजामिल दुष्ट व दुराचारी होने के बावजूद संतो की संगत से उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।आगे कथा का वर्णन करते हुवे कहते है कि अजामिल कन्यकुब्ज ब्राम्हण कुल में जन्मे कर्मकाण्डी थे। एक दिन नदी की तरफ जाते हुवे एक नर्तकी को देखा जो वेश्या थी उसे घर ले अयेऔर पत्नी बना कर रख लिया।एक दिन सन्तो को हुजूम उसी रास्ते से गुजर रहा था शाम होने पर वही डेरा जमा लिया ये सब देख कर अजामिल को बहुत गुस्सा आया और बुरा भला कहने लगा यह सब सुन उसकी पत्नी नर्तकी बहार आई और समझा कर अंदर ले गई।सुबह होते ही दक्षिणा मांगने आये संतो पर एक बार अजामिल फिर आग बबूला हो गया तब सन्तो ने कहा हमे धन,दौलत कुछ नही चाहिये बस अपने पुत्र का नाम नारायण रख लेना यह कह कर चले गये।अजामिल ने वैसा ही किया जब अंत समय आया तो प्रेम वश अपने पुत्र की नाम नारायण लेने मात्र से ही अजामिल की मोक्ष हो गई। पंडित जी के द्वारा जड़भरत व प्रह्लाद की कथा भी सुनाई।कथा दोपहर दो बजे से प्रारंभ की जाती है।मुख्य यजमान जगदीश प्रसाद कौशिक व कमलादेवी कौशिक जी है।भागवत कथा सुनने गांव के अलावा कमरीद, सिवनी,कोटाडबरी आदि गांवों के लोग पहुँच रहे है।


