पत्थलगांव- लगभग 10 दिनों से मंगलमूर्ति भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापित कर भक्तिभाव में लीन होने के पश्चात आज दिन रविवार को पूरे विधि-विधान के साथ श्री गणेश की पूजा-पाठ, हवन कर अपने अपने परिवार की सुख, शांति व समृद्धि के लिए आराधना करते हुए किलकिलेश्वर धाम नदी में मूर्तियां विसर्जित की गई।
इस दौरान कई मोहल्लेवासी ग्रामवासी व पत्थलगांव शहर से भी यहां आए हुए श्रद्धालुओं द्वारा आरती कर रिद्धि-सिद्धि और भगवान गणेश की प्रतिमा के दर्शन हुए।
पत्थलगांव के अम्बिकापुर रोड़ स्थित अधिवक्ता बसंत शर्मा के गृह निवास पर भी मूर्ति स्थापित की गई थी मूर्ति उनके स्वयं के हाथों से बनाई गई थी जो अत्यंत ही मनमोहक होने पर और मूर्ति की एक झलक पाने के लिए कई लोग व्याकुल थे।
श्री शर्मा ने बताया कि प्रतिवर्ष उनके द्वारा मूर्ति को स्वयं अपने हाथों से बनाकर स्थापित किया जाता है मगर जैसे जैसे विसर्जन का समय पास आता है मन मे विरह वेदना उत्पन्न होने लगती है यूं लगता है मूर्ति को घर पर ही प्रतिदिन के लिए स्थापित करने की भावना जागृत होती है। मगर विधि विधान के अनुसार मूर्ति विसर्जन करने की परंपरा मानी गयी है। इसीलिए मूर्ति(प्रतिमा) प्रतिवर्ष विसर्जित की जाती है।
इस दौरान साथ साथ पत्थलगांव मंडी प्रांगण पर विराजमान मंगलमूर्ति श्री गणेश का विसर्जन बड़े ही धूमधाम से किया गया।
पूर्ण विधिविधान से आरती संग्रह कर भक्तिभाव में मग्न होकर भगवान गणेश के जयकारे लगाते हुए आरती के बाद नारियल,बूंदी,लाही,पेड़ा, सेव,केला,मिश्री, अन्य प्रसाद श्रद्धालुओं में बाटे गए।
"गणपति बप्पा मोरया, अगले वर्ष जल्द ही आना नारों के साथ हर्सोल्लास से विसर्जन महोत्सव मनाया गया।
इस अवसर पर किलकिलेश्वर धाम में आये सभी श्रद्धालुओं ने श्री श्री 1008 कपिलदास मुनि बाबा के श्री चरणों मे हाजरी लगाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
नागरिको द्वारा कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा जारी किए दिशा निर्देशों का पालन करते हुए दूरी बनाकर मास्क, सेनेटाइजर, गमछा, का उपयोग किया गया।


