आपको बता दें कि वनपरिक्षेत्र मण्डल चौकी पंड्रापाठ ग्राम कुरकुरिया का है जहां गोपाल यादव नामक व्यक्ति ने मनमानी रूप से साल की पेंड को कटाई करते है उसी दौरान गांव के कुछ लोगों द्वारा आपत्ति जताई और ग्रामीणों ने मौके पर वन कर्मियों को सूचना दी गई,जब विभाग वाले ने दबंग से पूछताछ की तो दबंग द्वारा कहा जाता है कि जलाऊ के लिए कटाई कर रहा हूं,और वन विभाग के द्वारा फिर वही दबंग को सौंप दिया जाता है, जब कि पूरे लकड़ियों को जप्त करनी चाहिए था,हलाकि ऐसे कारवाई को नहीं मानते ग्रामीण जिससे इस तरीक़े की करवाई से ग्रामीण असन्तुष्ट हैं,
साफ़ तस्वीरों से अंदाजा लगाया जा सकता है ऐसे ही लोग जलाऊ लकड़ी के लिए गिरे पड़े हुए लकड़ियों को ले जाने की वजाए जिंदा बड़े पेड़ नीचे से ही काट कर बर्बाद की जा रही है,और ऐसे ही जंगलों में कई जगहों पर बिन वज़ह काट काट कर छोड़ दिया गया है,अगर अपराधियों को संरक्षण दिया जाए तो जंगलों की क्या हाल स्थिति होगी,आखिर कार इतना वन विभाग द्वारा क्यों मनोबल बढ़या जा रहा जहां लकडाउन का फायदा उठाते हुए लकड़ी कि अवैध तस्करी करने वाले के द्वारा वन की कटाई कर वन आपदा को क्षती पहुंचा रहे हैं आखिर क्यूं कार्यवाही नही होती आखिर कार कब तक चलेगी मनमानी राज शासन प्रशासन क्यों मौन है इस बिषय पर उचित कार्यवाही होनी चाहिए


