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गुरुवार, 10 अगस्त 2023

कर्म योगी श्री सुंदरलाल कौशिक की जीवनशैली प्रेरणा प्रद

 


रिपोर्टर रामखिलावन यादव

कमरीद  अनाथ बच्चों के बारे में व्याप्त भ्रांतियों का निवारण करते हुए बच्चों के साथ निवास करना, उनके पकाए हुए भोजन को ग्रहण करना,उन्हीं के द्वारा बोरिंग या कुए से लाए हुए जल को पीना, उन्हें अपने बच्चों से भी ज्यादा प्यार और समय देते रहना। छोटे-बड़े सभी अनाथ बच्चों को अपनी संस्था "मां भगवती देवी वात्सल्य मंदिर कमरीद "में प्रवेश देकर उनकी सेवा करना- ये अविश्वसनीय, परंतु सत्य गतिविधियां हैं एक ऐसे कर्मयोगि की, जिन्होंने अपने जीवन को समग्र रूप से परमार्थ में झोंक कर समाज सेवा की अनुठा मिसाल कायम की है। ऐसे कर्मठ तथा निष्पृह समाजसेवी का नाम है -"सुंदरलाल कौशिक "

              आपका जन्म  5 जनवरी सन 1956 ईस्वी को छत्तीसगढ़  प्रांत के, जांजगीर जिला के अंतर्गत चांपा तहसील ,के कमरीद ग्राम में , पिता  श्री सुदर्शन प्रसाद कौशिक एवं माता श्रीमती राधा देवी कौशिक के घर आंगन में हुआ। आप  3 भाई एवम  2बहनों में  सबसे बड़े थे।जब आप 10 वर्ष के थे तो इतनी छोटी उम्र में ही आपके  पिताजी का स्वर्गवास  हो गया ।बड़े होने की वजह से घर की संपूर्ण जिम्मेदारी बचपन से ही आपके ऊपर आ गई।खेती तो आपकी पर्याप्त थी मगर उस समय उपज ज्यादा नहीं होती थी,  इसलिए परिवार के पालन हेतु आपने अन्यत्र काम किए एवम नौकरी भी किए ।आप गांव में सुंदर गौटिया  के नाम से प्रसिद्ध हैं।बचपन से ही आप रामायण गायन एवं प्रवचन करते थे ।आपके बाल प्रतिभा को देखकर सभी लोग मंत्र मुक्ध हो जाते थे।   आपको रामायण गायन एवम प्रवचन में अनेकों इनाम भी प्राप्त हुए हैं। आपकी प्रारंभिक शिक्षा ग्राम अफरीद में तत्पश्चात जांजगीर में 10वीं तक की हुई। आप पढ़ने लिखने में बचपन से ही कुशाग्र थे ,मगर घर की परिस्थिति के वजह से आगे की पढ़ाई  नहीं कर पाए । लेकिन आप आगे के पढ़ाई हेतु  प्रयासरत रहे। आप कुछ सालों तक ग्राम जोबी में रहे एवं श्री कृष्ण लीला में भी भाग लेते रहे। 16 वर्ष की आयु में आपका विवाह नीरा देवी पिता श्री नरबदू कश्यप,मां श्री मति समुंद बाई कश्यप ,ग्राम नैला,जांजगीर चांपा के साथ हो गया। आपके 3पुत्रियां एवम 1पुत्र हैं। आपके पिताजी के धार्मिक एवम सामाजिक प्रवृत्ति के  होने के वजह से ही समाज हेतु समर्पण का बीज आपके अंदर भी पनप रहा था। इस भावना को परिपुष्ट  किया गायत्री परिवार ने। आप 1978 में गायत्री परिवार में आने के बाद पूर्णरूप से सामाजिक कार्य में संलग्न हो गए,तथा 1980 में गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी से दीक्षा लेकर प्रचारक बन गए।

            राष्ट्र एवम समाज के समग्र उन्नयन का जो बीज मंत्र आपको गायत्री परिवार से प्राप्त हुआ उसी को मूल पूंजी के साथ समाज की चुनौती को स्वीकार कर आपने पिछले वर्षों में जो उल्लेखनीय कार्य किए हैं वह इस प्रकार से हैं -

1)  ग्राम कमरीद में प्राइमरी तक ही स्कूल था उसे आप आगे बढ़ाते हुए अपने बड़े बेटे स्वर्गीय जगदीश प्रसाद कौशिक के नाम से मिडिल स्कूल का निर्माण करवाया।

2) अपनी मां स्व. राधा देवी कौशिक के नाम से आचार्य श्रीराम शर्मा हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूल का निर्माण खुद के जमीन बेचकर करवाया एवम 1990 से संचालित भी करते रहें।

3) अपने पिताजी स्वर्गीय श्री सुदर्शन प्रसाद कौशिक के नाम पर गायत्री शक्तिपीठ चांपा के मंदिर के ऊपर तीन कमरे का निर्माण करवाया।

4) "माता भगवती देवी वात्सल्य मंदिर कमरीद"के नाम से अनाथालय का निर्माण कार्य एवं संचालन भी किए सभी बच्चों को पढ़ा लिखा कर योग्य बनाकर शादी विवाह भी किये।

5) कुष्ठ निवारक संघ कात्रे नगर चांपा में श्री गणेश राम बापट जी महराज से जुड़कर 1 वर्ष सेवा कार्य किए।

6) अपने पुत्र बद्रीविशाल कौशिक का विवाह कुर्मी समाज के अन्य फिरका में सर्वप्रथम करके फिरका परस्ती को तोड़ा एवं कुर्मी समाज के लोगों में जन जागरूकता लाएं।

7) आपके द्वारा गांव में 3 तालाबों की खुदाई करवाई गई मुक्तिधाम, शौचालय ,चबूतरा इत्यादि का निर्माण कार्य सामाजिक तौर पर आप करते रहे।

8) "गरीब निवाज सेवा समिति" बनाकर हमेशा गरीबों की मदद करते रहे।

9) वृक्षारोपण जैसे महान कार्य भी आपने किए लगभग आपके द्वारा रोपे गए 100 पौधे वृक्ष बनकर अभी  सुरक्षित हैं एवम आपकी महानता के महिमा गा रहे हैं।

10) विश्वविद्यालय हेतु सांकरा  में आपने लाखों रुपयों का आर्थिक सहयोग ,एवम  चिल्हाटी हाई स्कूल के विकाश हेतु 50हजार का सहयोग कर सपत्नीक तन मन धन से लोग कार्य में लगे रहे।

11) सन 2020 में आपने अपने घर में यज्ञ कर परिवारवालों के समक्ष देहदान की घोषणा के साथ स्वयं का श्राद्ध तर्पण कर सबको चौका दिया।

12) देहदान के साथ आपने जीवन दान भी किया।सपत्नीक गृहस्थ जीवन को सुंदर जीते हुए आप दोनो देहदान के बाद 3 वर्षों तक लगातार घर के मोह माया को त्यागकर वानप्रस्थ जीवन में प्रवेश कर विभिन्न शक्तिपीठों एवम प्रज्ञापीठों में अंशदान एवम समयदान देते हुए लोगो को जागरूक करते रहे।

13) अपने मृत्यु उपरांत मृतक भोज किसी भी दबाव में न  कराने ,एवं मृत्यु पर किसी भी प्रकार के लौकिक क्रिया ना करने  का आदेश अपने परिवार वालों को देकर समाज में एक नया संदेश दिया।

14) मृतक के निमित्त अगर कुछ देना चाहे  तो गरीब बच्चों के  शिक्षा के लिए  आपने जो फंड बनाया है उसमें दान करें , या फिर वृक्षारोपण जैसे लोग मंगल के कार्य करें । ये आपका संदेश है।

15) आपके द्वारा बच्चों के विकाश हेतु बाल संस्कार शाला की स्थापना की गई, तथा सुचारुरूप से संचालन हेतु बाल आचार्य के रूप में विवेकानंद कौशिक एवम प्रज्ञानंद कश्यप को जिम्मेदारी दी।

16) युवाओं के विकाश हेतु भी आपने युवा जागरण शिविर चलाए,एवम युवाओं का संगठन बनाया।जिसके मुखिया श्री बद्रीविशाल कौशिक को बनाया।

17)महिलाओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आपने "सविता महिला मंडल "का गठन किया ,जिसका कार्यभार की जिम्मेदारी श्री मति ऋतम्भरा कश्यप को दिया।

18)गायत्री शक्तिपीठ चांपा में आपने अपने परिवार के लोगों द्वारा आर्थिक सहयोग दिलवाकर विभिन्न निर्माण कार्य करवाए।

19) अनाथ बच्चों के पालन पोषण हेतु आपने अपने स्वयं के 1एकड़ जमीन को ट्रस्ट के नाम दान कर दिया।

20) गांव के सर्वांगीण विकास के लिए आप हमेशा प्रयासरत रहे। विभिन्न आयोजन आपके द्वारा गांव में होते रहे।जैसे बुजुर्गो का सम्मान, सद्गृहस्थों का सम्मान,आदर्श बहुओं का सम्मान,प्रतिभावान छात्र छात्राओं का सम्मान इत्यादि।

       "नर सेवा ही नारायण सेवा" के मंत्र से अनुप्राणित होकर कौशिक जी अहरनीस  सेवा कार्य में सपत्नीक जुटे रहे। कात्रे नगर कुष्ठ आश्रम सोठी में 1 वर्ष आपने जो सेवा कार्य में समय बिताते हुए अपने हाथों से  अनुभव लिखे हैं वह हमें आपके अंतरंग भावों को प्रदर्शित करते हुए साफ दिखाई देते हैं।

         आपने सभी को मार्ग दिखाया,एवम सही रास्ते पर ही हमेशा चलने की प्रेरणा दी है। आपके दिखाए सतमार्ग पर चलकर बहुत से लोग आज सफल हो रहे हैं। आप 27 फरवरी 2023 को अपने स्थूल शरीर को त्यागकर सूक्ष्म शरीर से मां गायत्री के गोद  में जा कर बैठ गए। आपके द्वारा किए गए महान कार्य को हम सदा स्मरण रखेंगे एवम हमेशा आभारी रहेंगे।आपको कोटि - कोटि नमन

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